यदि भारत की स्थिति की तुलना चीन से की जाए तो तस्वीर अपेक्षाकृत भिन्न दिखाई देती है। विश्व असमानता रिपोर्ट 2026 बताती है कि चीन ने 1980 के बाद वैश्विक आय संरचना में उल्लेखनीय परिवर्तन किया है और उसकी आबादी का बड़ा हिस्सा मध्यम वर्ग की श्रेणी में शामिल हुआ है। इसका अर्थ यह है कि चीन में मध्यम वर्ग का विस्तार हुआ और औसत नागरिक की वैश्विक तुलना में आय-स्थिति बेहतर हुई। इसके विपरीत भारत के बारे में रिपोर्ट का संकेत यह है कि 2025 तक भारत की बहुत बड़ी जनसंख्या वैश्विक तुलना में “bottom 50%” आय वर्ग में बनी रही, जिससे यह निष्कर्ष निकलता है कि भारत में आय-उन्नयन की गति अपेक्षित स्तर तक व्यापक नहीं हो पाई। अतः भारत और चीन की तुलना में स्पष्ट है कि दोनों देशों ने आर्थिक विकास किया, परन्तु चीन में मध्यवर्गीय विस्तार अधिक व्यापक रूप से परिलक्षित हुआ।
वैश्विक संदर्भ में आय असमानता और भी अधिक चिंताजनक स्तर पर है। रिपोर्ट के अनुसार दुनिया की शीर्ष 10% आबादी के पास वैश्विक संपत्ति का लगभग 75% केंद्रित है, जबकि निचले 50% के हिस्से में मात्र 2% संपत्ति है। इतना ही नहीं, दुनिया के Top 0.001% (लगभग 60,000 लोग) के पास इतनी संपत्ति है जो विश्व की bottom 50% आबादी की संपत्ति से लगभग तीन गुना मानी गई है। यह स्थिति बताती है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में “अत्यधिक अमीरी” (ultra-rich concentration) तेजी से बढ़ रही है और असमानता केवल देशों के भीतर ही नहीं, बल्कि देशों के बीच भी स्थायी चुनौती बनी हुई है।
लिंग असमानता (gender inequality) के संदर्भ में रिपोर्ट के निष्कर्ष उतने ही गंभीर हैं। भारत में महिला श्रमबल भागीदारी (Female Labour Force Participation) मात्र 15.7% बताई गई है, जो विश्व के कई विकासशील देशों की तुलना में भी कम है। हालाँकि सावधिक श्रम बल सर्वेक्षण, 2025 के रिपोर्ट के अनुसार यह लगभग 35% है। यह स्थिति दर्शाती है कि भारत में महिलाओं की आर्थिक भागीदारी सामाजिक-आर्थिक संरचनाओं, सुरक्षा, अवसरों और घरेलू दायित्वों के कारण सीमित है। विश्व स्तर पर भी महिलाएँ पुरुषों की तुलना में औसतन 61% कम श्रम आय अर्जित करती हैं, और यदि अवैतनिक देखभाल कार्य (unpaid care work) को शामिल किया जाए तो वास्तविक हिस्सेदारी और घटकर लगभग 32% के आसपास रह जाती है। रिपोर्ट का एक अत्यंत महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह है कि महिलाएँ वैश्विक श्रम आय (labour income) का केवल 25% ही प्राप्त करती हैं, जो संरचनात्मक भेदभाव और अवसर-असमानता को उजागर करता है।
| नीति क्षेत्र (Policy Area) | मुख्य उद्देश्य (Core Objective) | प्रमुख सिफारिशें (Recommendations) |
|---|---|---|
| मानव पूँजी में सार्वजनिक निवेश (Public Investment in Human Capital) | शुरुआत से ही जीवन के अवसरों (life chances) में समानता लाना तथा समावेशी समाज का निर्माण | मुफ्त/उच्च-गुणवत्ता शिक्षा, सार्वभौमिक स्वास्थ्य सेवा, चाइल्डकेयर, तथा पोषण कार्यक्रमों में निवेश |
| पुनर्वितरण एवं सामाजिक सुरक्षा (Redistribution & Social Protection) | निम्न आय समूहों तक संसाधन सीधे पहुँचाना और स्थिरता प्रदान करना | कमजोर परिवारों हेतु नकद अंतरण (cash transfers), पेंशन, तथा बेरोजगारी लाभ (unemployment benefits) लागू करना |
| लिंग समानता को आगे बढ़ाना (Advancing Gender Equality) | संरचनात्मक बाधाओं को हटाना तथा अवैतनिक देखभाल कार्य (unpaid care work) का पुनर्वितरण | सस्ता/सुलभ चाइल्डकेयर, समान parental leave, तथा समान वेतन कानूनों (equal pay laws) को सख्ती से लागू करना |
| प्रगतिशील एवं हरित कराधान (Progressive & Green Taxation) | सार्वजनिक संसाधन न्यायपूर्ण तरीके से जुटाना और जलवायु लक्ष्यों के अनुरूप राजकोषीय नीति बनाना | प्रगतिशील संपत्ति/आय कर (wealth/income taxes) लागू करना; कर/सब्सिडी का उपयोग कर low-carbon technologies को बढ़ावा देना |
| वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में सुधार (Reforming Global Financial System) | ऐसी प्रणालीगत पक्षपातपूर्ण व्यवस्थाओं (systemic biases) को सुधारना जो गरीब देशों से अमीर देशों की ओर संसाधन प्रवाह बढ़ाती हैं | असमान वित्तीय प्रवाह घटाने हेतु नई वैश्विक मुद्रा व्यवस्थाएँ (global currency arrangements) व सुधारात्मक प्रणालियों की खोज/क्रियान्वयन |
इस प्रकार भारत में आय असमानता तथा लिंग असमानता दोनों ही विकास की समावेशिता (inclusive development) को चुनौती दे रहे हैं; चीन ने मध्यवर्गीय विस्तार में बेहतर प्रदर्शन किया है; जबकि वैश्विक स्तर पर धन का संकेंद्रण अत्यधिक बढ़कर सामाजिक-आर्थिक न्याय के लिए गंभीर संकट बन गया है। इस चुनौती से निपटने हेतु सरल टैक्स व्यवस्था, सामाजिक सुरक्षा, महिला-केंद्रित रोजगार नीतियाँ, तथा शिक्षा-स्वास्थ्य में निवेश जैसे कदम निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।
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