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बिहार में 01 अप्रैल 2026 से लागू न्यूनतम की अद्यतन दर (Recent Minimum Wage in Bihar)

न्यूनतम मजदूरी (Minimum Wages) श्रमिकों के आर्थिक संरक्षण का एक बुनियादी कानूनी साधन है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि श्रमिक को उसके श्रम के बदले इतनी पारिश्रमिक राशि अवश्य मिले जिससे वह और उसका परिवार सम्मानजनक जीवन-यापन कर सके। बिहार सरकार ने पहली बार सभी नियोजनों के लिए न्यूनतम मजदूरी की दर को अधिसूचित किया है। इसका मुख्य उद्देश्य है— श्रमिकों का शोषण रोकना , श्रम के बदले उचित प्रतिफल सुनिश्चित करना, असंगठित एवं कमजोर वर्ग के श्रमिकों को कानूनी सुरक्षा देना, महँगाई के अनुरूप मजदूरी में समय-समय पर संशोधन करना। सभी प्रकार के कामगारों (कृषि कामगार को छोड़कर) के लिए लागू न्यूनतम मजदूरी की दरें- घरेलू नियोजनों में एक घंटा कार्य करने की मजदूरी, दैनिक अधिसूचित न्यूनतम मजदूरी को 8 से भाग देकर निकाली जाएगी। तथा  मासिक मजदूरी की गणना दैनिक दर × 26 के आधार पर की जाएगी। न्यूनतम मजदूरी का निर्धारण श्रमिकों के कौशल स्तर के आधार पर किया जाता है: अकुशल (Unskilled), अर्ध-कुशल (Semi-Skilled), कुशल (Skilled) और अति-कुशल (Highly Skilled) । हाल ही में, बिहार सरकार ने विभिन्न क...

देश में शीर्ष 1% के पास कुल संपत्ति का लगभग 40%- आय असमानता

  हाल ही में ‘वर्ल्ड इनइक्वलिटी लैब’ द्वारा जारी तीसरी ‘विश्व असमानता रिपोर्ट 2026’ में पुरे विश्व में आय, संपत्ति, लिंग, जलवायु उत्तरदायित्व और क्षेत्रीय बंटवारे के मामले में दुनिया भर में असमानता के अभूतपूर्व स्तर पर प्रकाश डाला गया है। विश्व असमानता रिपोर्ट 2026 के निष्कर्ष आज के विकास विमर्श के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं क्योंकि यह स्पष्ट करते हैं कि आर्थिक वृद्धि के बावजूद आय तथा अवसरों का वितरण समान नहीं हो रहा है। रिपोर्ट के अनुसार भारत में आय असमानता अत्यधिक तीव्र है। भारत में शीर्ष 10% आबादी राष्ट्रीय आय का लगभग 58% प्राप्त करती है, जबकि निचले 50% के हिस्से में केवल 15% आय आती है। यह अंतर इस तथ्य को दर्शाता है कि आर्थिक प्रगति का बड़ा भाग सीमित जनसंख्या तक केंद्रित हो रहा है। इसके साथ ही भारत में संपत्ति असमानता भी और अधिक गहरी है- शीर्ष 1% के पास कुल संपत्ति का लगभग 40% होने का अनुमान रिपोर्ट में व्यक्त किया गया है। इससे यह संकेत मिलता है कि आय असमानता के साथ-साथ संपत्ति संचय भी कुछ वर्गों तक सीमित है, जो दीर्घकाल में सामाजिक गतिशीलता (social mobility) को कमजोर कर...

पदनाम नहीं, वास्तविक कार्य तय करेगा “कामगार” की पहचान

पदनाम नहीं, वास्तविक कार्य तय करेगा “कामगार” की पहचान — सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय (Srinibas Goradia बनाम Arvind Kumar Sahu, 2025) सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में यह स्पष्ट किया है कि किसी कर्मचारी को Industrial Disputes Act, 1947 के अंतर्गत “कामगार” माना जाएगा या नहीं, इसका निर्धारण उसके पदनाम (Designation) से नहीं बल्कि उसके द्वारा किए जाने वाले वास्तविक और प्रमुख कार्य (Actual / Dominant Duties) से होगा। यह निर्णय Srinibas Goradia बनाम Arvind Kumar Sahu एवं अन्य मामले में दिया गया, जो श्रम कानून के क्षेत्र में दूरगामी प्रभाव डालने वाला है। इस मामले की पृष्ठभूमि यह थी कि अपीलकर्ता श्री Srinibas Goradia एक होटल में कैशियर के रूप में कार्यरत थे। उन्होंने कई वर्षों तक सेवा दी, किंतु बाद में उनका वेतन बंद करते हुए उनकी सेवाएं समाप्त कर दी गईं। इसके विरुद्ध उन्होंने श्रम न्यायालय में यह कहते हुए विवाद उठाया कि उनकी सेवा अवैध रूप से समाप्त की गई है और वे Industrial Disputes Act के अंतर्गत “कामगार” हैं। श्रम न्यायालय ने यह माना कि होटल एक “उद्योग” है और अपीलकर्ता द्वारा किय...

श्रम शक्ति नीति, 2025- भारत की राष्ट्रीय श्रम और रोजगार नीति

  श्रम शक्ति नीति, 2025- भारत की राष्ट्रीय श्रम और रोजगार नीति   भारत सरकार ने श्रम शक्ति नीति , 2025 का प्रारूप प्रकाशित किया है जिसका उद्येश्य श्रमिकों के लिए अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन के Descent Work Agenda को पाने के साथ-साथ विकसित भारत के संकल्प को पूर्ण करना है । आइये जानते है इसके प्रमुख बातों को-   1. प्रस्तावना ( Introduction) Ø “ श्रम शक्ति नीति 2025” भारत के श्रम और रोजगार क्षेत्र के लिए एक समग्र दृष्टि कोण प्रस्तुत करता है। Ø इसका उद्देश्य एक न्यायपूर्ण और समावेशी श्रम व्यवस्था बनाना है जो हर श्रमिक की गरिमा और अधिकार को सुनिश्चित करने के साथ-साथ उत्पादकता को बढ़ावा दे। Ø यह नीति “श्रम धर्म” अर्थात कार्य के नैतिक मूल्य पर आधारित है। Ø डिजिटलीकरण और गिग/प्लेटफ़ॉर्म कार्य को ध्यान में रखते हुए यह नीति बनाई गई है। Ø नीति के अनुसार श्रम मंत्रालय अब “ Employment Facilitator” की भूमिका निभाएगा। Ø राष्ट्रीय करियर सेवा ( NCS) को रोजगार के लिए डिजिटल सार्वजनिक ढांचे ( Digital Public Infrastructure - DPI) के रूप में विकसित करने का संकल्प इस नीति में रखा...

Bihar’s New Minimum Wages – Effective from 1st October 2025

  The Government of Bihar has recently increased the minimum wage rates. As we know, minimum wage is the wage below which no worker can be paid. Along with this, the Bihar Government has classified workers into four categories: unskilled, semi-skilled, skilled, and highly skilled. India has remained a developing and labour-intensive country. A considerable proportion of its workforce is engaged in the unorganised sector. It is estimated that nearly 90% of workers are employed in this unorganised segment. To protect the rights of such workers and to ensure them a minimum standard of living, the Minimum Wages Act, 1948, was enacted. The objective of this Act is to ensure that no worker is paid less than the minimum wages fixed for the work he perform. The necessity of this legislation arose due to several socio-economic reasons, such as preventing exploitation of labour, ensuring humane living conditions, reducing economic inequality, increasing productivity and efficiency, reducing...