न्यूनतम मजदूरी (Minimum Wages) श्रमिकों के आर्थिक संरक्षण का एक बुनियादी कानूनी साधन है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि श्रमिक को उसके श्रम के बदले इतनी पारिश्रमिक राशि अवश्य मिले जिससे वह और उसका परिवार सम्मानजनक जीवन-यापन कर सके। बिहार सरकार ने पहली बार सभी नियोजनों के लिए न्यूनतम मजदूरी की दर को अधिसूचित किया है। इसका मुख्य उद्देश्य है— श्रमिकों का शोषण रोकना , श्रम के बदले उचित प्रतिफल सुनिश्चित करना, असंगठित एवं कमजोर वर्ग के श्रमिकों को कानूनी सुरक्षा देना, महँगाई के अनुरूप मजदूरी में समय-समय पर संशोधन करना। सभी प्रकार के कामगारों (कृषि कामगार को छोड़कर) के लिए लागू न्यूनतम मजदूरी की दरें- घरेलू नियोजनों में एक घंटा कार्य करने की मजदूरी, दैनिक अधिसूचित न्यूनतम मजदूरी को 8 से भाग देकर निकाली जाएगी। तथा मासिक मजदूरी की गणना दैनिक दर × 26 के आधार पर की जाएगी। न्यूनतम मजदूरी का निर्धारण श्रमिकों के कौशल स्तर के आधार पर किया जाता है: अकुशल (Unskilled), अर्ध-कुशल (Semi-Skilled), कुशल (Skilled) और अति-कुशल (Highly Skilled) । हाल ही में, बिहार सरकार ने विभिन्न क...
उत्तिष्ठत जाग्रत प्राप्य वरान्निबोधत