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बिहार में 01 अप्रैल 2026 से लागू न्यूनतम की अद्यतन दर (Recent Minimum Wage in Bihar)

न्यूनतम मजदूरी (Minimum Wages) श्रमिकों के आर्थिक संरक्षण का एक बुनियादी कानूनी साधन है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि श्रमिक को उसके श्रम के बदले इतनी पारिश्रमिक राशि अवश्य मिले जिससे वह और उसका परिवार सम्मानजनक जीवन-यापन कर सके। बिहार सरकार ने पहली बार सभी नियोजनों के लिए न्यूनतम मजदूरी की दर को अधिसूचित किया है।



इसका मुख्य उद्देश्य है—

  • श्रमिकों का शोषण रोकना,
  • श्रम के बदले उचित प्रतिफल सुनिश्चित करना,
  • असंगठित एवं कमजोर वर्ग के श्रमिकों को कानूनी सुरक्षा देना,
  • महँगाई के अनुरूप मजदूरी में समय-समय पर संशोधन करना।

सभी प्रकार के कामगारों (कृषि कामगार को छोड़कर) के लिए लागू न्यूनतम मजदूरी की दरें-







घरेलू नियोजनों में एक घंटा कार्य करने की मजदूरी, दैनिक अधिसूचित न्यूनतम मजदूरी को 8 से भाग देकर निकाली जाएगी। तथा मासिक मजदूरी की गणना दैनिक दर × 26 के आधार पर की जाएगी।

न्यूनतम मजदूरी का निर्धारण श्रमिकों के कौशल स्तर के आधार पर किया जाता है: अकुशल (Unskilled), अर्ध-कुशल (Semi-Skilled), कुशल (Skilled) और अति-कुशल (Highly Skilled)। हाल ही में, बिहार सरकार ने विभिन्न कार्य भूमिकाओं को इन श्रेणियों में विस्तार से वर्गीकृत किया था।

अकुशल कार्य (Unskilled work): इसका तात्पर्य उस कार्य से है जिसे करने के लिए किसी विशेष कौशल या अनुभव की आवश्यकता नहीं होती है। ऐसा कार्य बिना किसी औपचारिक प्रशिक्षण या निर्णय लेने की क्षमता के किया जाता है। ऐसे कार्य की आवश्यकताएं केवल शारीरिक श्रम और कार्य परिसर के बुनियादी ज्ञान तक सीमित होती हैं।

अर्ध-कुशल कार्य (Semi-skilled work): इसका तात्पर्य उस कार्य से है जिसमें कार्य के अनुभव के माध्यम से प्राप्त कौशल या सक्षमता के एक निश्चित स्तर की आवश्यकता होती है, और जिसे किसी कुशल श्रमिक की देखरेख या मार्गदर्शन में प्रभावी ढंग से किया जा सकता है।

कुशल कार्य (Skilled work): इसका तात्पर्य उस कार्य से है जिसमें कौशल या सक्षमता प्राप्त करने के लिए शैक्षिक योग्यता और प्रशिक्षण या व्यावहारिक अनुभव की आवश्यकता होती है, और जिसे स्वतंत्र रूप से तथा उचित निर्णय क्षमता का उपयोग करके किया जा सकता है। ऐसे कार्य में अकुशल और अर्ध-कुशल श्रमिकों का पर्यवेक्षण (Supervision) भी शामिल है।

अति-कुशल कार्य (Highly skilled work): इसका तात्पर्य उस कार्य से है जिसमें निर्दिष्ट कार्यों के निष्पादन में उच्च स्तर की निपुणता और पूर्ण सक्षमता की आवश्यकता होती है, जो आवश्यक शैक्षिक योग्यता के साथ-साथ प्रमाणन और गहन तकनीकी या व्यावसायिक प्रशिक्षण, अथवा पर्याप्त व्यावहारिक कार्य अनुभव के माध्यम से प्राप्त की गई हो। ऐसे कार्य में इसके निष्पादन के लिए आवश्यक निर्णयों या परिणामों की पूरी जिम्मेदारी शामिल होती है, और इसमें कुशल श्रमिकों का पर्यवेक्षण भी शामिल होता है।


विस्तृत अधिसूचना के लिए यहाँ क्लिक करें-

01 अप्रैल 2026 से प्रभावी न्यूनतम मजदूरी की दर



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